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मंगल भात

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मंगलभात पूजा या दोष निवारण – अवंतिका में गृहराज मंगल का जन्म स्थान है, ग्रहों में मंगल का तीसरा स्थान प्राप्त है जिन जातकों की कुंडली में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश स्थानों पर यदि मंगल हो तो जातक की पत्रिका मांगलिक कहलाती है । हर स्थान पर मंगल कभी भी अमंगल नहीं करतें उपरोक्त स्थानों पर ही कुछ समस्याऐ आती है जैसे विवाह में विलम्ब, ऋण -वृद्धि, सन्तान प्राप्ति में बाधा, राजनैतिक क्षेत्र में वर्चस्व में कमी, प्रशासनिक क्षेत्र में असफलता, भवन, भूमि, वाहन, धातु आदि के व्यवसाय में हानि इत्यादि कारणों से जातक हमेशा मानसिक व शारीरिक समस्याओं से ग्रसित रहता है इन सभी बाधाओं को दूर करने के लिये भगवान मंगल की विशेष आराधना कर उन्हें प्रसन्न करने हेतु कुछ अनुष्ठान किये जाते है जो मंगल के मूल जन्म स्थान अवंतिका में खर्राता संगम अर्थात क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित स्वयं भू महामंगल श्री अंगारेश्वर ज्योतिर्लिंग पर संपन्न होते है जिनमे मुख्य रूप से पंचामृत पूजा, गुलाल पूजा, तथा भात पूजन, मंगल मंत्रो से जाप व हवन प्रमुख है । उक्त पूजन पूरी श्रद्धा व विश्वास से करने पर जातक के क्रोध में कमी, मन में स्थिरता तथा मस्तिष्क में शीतलता प्राप्त होती है। पके हुए चावल में दही व पंचामृत मिला कर भगवान मंगल को अर्पित करने से उन्हें शितलता प्राप्त होती है और जातक के अमंगल का हरण करते है ।